Saturday, December 10, 2011

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें Main unhen chhedoon aur kuchh na kahen-Mirza Ghalib

मैं  उन्हें  छेड़ूँ  और  कुछ  न  कहें चल  निकलते, जो मय पिए होते क़हर हो, या बाला हो, जो कुछ हो काश के तुम मेरे लिए जिए होते! मेरी क़िस्मत में  ग़म  गर इतना था दिल भी या रब, कई  दिए  होते आ ही जाता वो: रह  पर 'ग़ालिब'! कोई   दिन और  भी  जिए  होते                    ...

Monday, October 24, 2011

बाज़ीचः-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे Bazeecha e Atfal Hai Duniya Mere Aage - Mirza Ghalib

बाज़ीचः-ए-अत्फ़ाल  है दुनिया मेरे आगे होता है  शब-ओ-रोज़  तमाशा मेरे आगे इक खेल है औरंगे-ए-सुलेमाँ मेरे नज़दीक इक बात है  एजाज़े मसीहा मेरे आगे जुज़ नाम, नहीं सूरते आलम मुझे मंजूर जुज़ वहम  नहीं, हस्ति-ए-आशिया मेरे आगे होता है निहाँ  गर्द में सहरा, मेरे होते घिसता है जबीं ख़ाक पे: दरिया मेरे आगे मत पूछ के क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू  देख  के: क्या रंग ...

Monday, October 10, 2011

ज़िक्र उस परीवश का, और फिर बयाँ अपना Jikra us parivash ka aur fir bayaan apna

ज़िक्र  उस  परीवश  का, और  फिर  बयाँ  अपना बन  गया  रक़ीब  आखिर,  था  जो  राज़दाँ  अपना मय  वो:  क्यूँ  बहुत  पीते  बज़्मे  ग़ैर  में  यारब ! आज  ही  हुआ  मंजूर  उन  को  इम्तिहाँ  अपना मंज़र  इक  बुलन्दी  पर  और  हम  बना  सकते अर्श ...

Sunday, August 14, 2011

ख़िरद मन्दो से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है Khirad mando se kya poochhoon ki meri ibtida kya hai.

ख़िरद मन्दो  से  क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है कि मैं इस फिक्र में रहता हूँ मेरी इन्तहा क्या है खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रिज़ा क्या है नज़र आई  मुझे तक़दीर की गहराइयाँ इसमें न पूछ ऐ हमनशी मुझसे वो चश्मे-सुर्मा-सा क्या है नवाए-सुबह...

Friday, July 29, 2011

बे-खुदी ले गई कहाँ हम को Be-khudi le gayi kahaan ham ko

बे-खुदी  ले  गई  कहाँ  हम  को देर  से  इंतज़ार  है  अपना रोते  फिरते  हैं  सारी-सारी  रात अब  यही  रोज़गार  है  अपना दे  के  दिल  हम  जो  हो  गए  मजबूर इसमें  क्या ...

Sunday, July 3, 2011

हैराँ हूँ दिल को रोऊँ, के: पीटूँ जिगर को मैं ? HairaaN hoon dil ko ro'oon ki peetoon jigar ko main

हैराँ  हूँ  दिल  को   रोऊँ,  के:  पीटूँ  जिगर  को  मैं मक़दूर  हो  तो  साथ  रखूँ  नोह: गार  को  मैं छोड़ा  न:  रश्क   ने   के:  तेरे  घर  का  नाम  लूँ हर  यक  से  पूछता   हूँ  के:  जाऊँ  किधर  को  मैं ? जाना ...

Tuesday, June 28, 2011

ये: न: थी हमारी क़िस्मत के विसाले यार होता Ye na thi hamari kismat ke visale yaar hota-Galib

ये:  न:  थी  हमारी  क़िस्मत  के  विसाले  यार  होताअगर  और  जीते  रहते , यही   इंतज़ार  होतातेरे  वादे  पर  जिए  हम , तो  ये:,  जान  झूठ  जानाके  ख़ुशी  से  मर  न: जाते,...

Saturday, June 4, 2011

अजब नशात से, जल्लाद के चले हैं हम आगे Ajab nashat se jallad ke chale hain hum aage-Galib

अजब  नशात  से, जल्लाद के चले  हैं  हम आगेके: अपने साये से सर, पाँव से है दो कदम आगेकज़ा  ने  था  मुझे  चाहा  ख़राबे  बादः-ए-उल्फ़तफ़क़त  'ख़राब' लिखा, बस नः चल सका कलम आगेग़मे  ज़मानः ने  झाड़ी  नाश्ते  इश्क़  की मस्तीवगर्न: हम भी उठाते थे लज्ज़ते  अलम  आगेखुदा  के  वास्ते  दाद  इस जुनूने...

Sunday, May 22, 2011

हुई ताखीर, तो कुछ बाइसे ताखीर भी था Hui takhir, Toh kuch baaise takhir bhi tha

हुई ताखीर, तो कुछ बाइसे ताखीर भी थाआप आते थे, मगर कोई इनाँगीर भी थातुमसे बेजा है मुझे अपनी तबाही का गिलाउससे कुछ शाइब-ए-खूबी-ए-तकदीर भी थातू मुझे भूल गया हो तो पता बतला दूंकभी फ़ितराक में तेरे कोई नख्चीर भी था ?कैद में है तेरे वहशी की वोही जुल्फ की यादहाँ कुछ इक रंजे गराँ बारि-ए-जंजीर भी थाबिजली...

Monday, May 16, 2011

वो कहती है सुनो जानम मोहब्बत मोम का घर है Wo kahti hai suno janam mohabbat mom ka ghar hai

 वो  कहती  है  सुनो  जानम मोहब्बत  मोम का  घर  है तपिश ये बदगुमानी  की कहीं  पिघला  न  दे  इस को मैं  कहता  हूँ जिस  दिल  मैं  ज़रा  भी   बदगुमानी   हो वहाँ  कुछ  और ...

Saturday, May 14, 2011

ये तो नहीं कि ग़म नहीं ye toh nahin ki gam nahin

 ये तो नहीं कि ग़म नहीं हाँ! मेरी आँख नम नहीं तुम भी तो तुम नहीं हो आज हम भी तो आज हम नहीं अब न खुशी की है खुशी ग़म भी अब तो ग़म नहीं मेरी नशिस्त है ज़मीं खुल्द नहीं इरम नहीं क़ीमत-ए-हुस्न दो जहाँ कोई बड़ी रक़म नहीं लेते हैं मोल दो जहाँ दाम नहीं दिरम नहीं सोम-ओ-सलात से फ़िराक़ मेरे गुनाह कम नहीं मौत अगरचे मौत है मौत से ज़ीस्त कम नहीं              ...

दोस्त अहबाब की नज़रों में (Dost ki ahbaab nazron mein)

दोस्त अहबाब की नज़रों में बुरा हो गया मैंवक़्त की बात है क्या होना था क्या हो गया मैंदिल के दरवाज़े को वा रखने की आदत थी मुझेयाद आता नहीं कब किससे जुदा हो गया मैंकैसे तू सुनता बड़ा शोर था सन्नाटों कादूर से आती हुई ऐसी सदा हो गया मैंक्या सबब इसका था, मैं खुद भी नहीं जानता हूँरात खुश आ गई और दिन से ख़फ़ा हो गया मैंभूले-बिछड़े हुए लोगों में कशिश अब भी हैउनका ज़िक्र आया कि फिर नग़्मासरा हो गया मैं                          ...

Monday, May 9, 2011

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग (Mujhse pehli si mohabbat mere mehboob na maang)

मुझसे  पहली  सी   मोहब्बत  मेरे  महबूब   न  मांगमैंने  समझा  था  के  तू   है  तो  दरख्शां  है  हय्याततेरा  ग़म   है  तो  शाम -ए-दहर  का  झगड़ा क्या  हैतेरी  सूरत  से  है  आलम  में  बहारों  को  सबाततेरी  आँखों  के ...

Friday, March 25, 2011

हुस्न भी था उदास HUSSAN BHI THA UDAS

हुस्न भी था उदास,उदास ,शाम भी थी धुआं-धुआं  , याद सी आके रह गयी दिल को कई कहानियां | छेड़ के दास्तान-ए-गम अहले वतन के दरमियाँ , हम अभी बीच में थे और बदल गई ज़बां | सरहद-ए-ग़ैब तक तुझे साफ मिलेंगे नक्श-ए-पा , पूछना यह फिरा हूं मैं तेरे लिए कहां- कहां | रंग जमा के उठ गई कितने तमददुनो की बज्म , याद नहीं ज़मीन को , भूल गया है आसमां | जिसको भी देखिए वहीँ बज़्म में है गज़ल सरा, छिड़ गयी दास्तान-ए-दिल...

Saturday, February 26, 2011

चाँद तनहा है Chand Tanha Hai

 चाँद  तनहा  है  आसमान  तनहा दिल  मिला  है  कहाँ  कहाँ  तनहा बुझ  गयी  आस  छुप  गया  तारा थर  थराता  रहा  धुआं  तनहाज़िन्दगी  क्या  इसी  को  कहते  हैं जिस्म  तनहा  है ...