Saturday, December 24, 2016

बहुत दराज़ फ़साना है ये Bahut daraaz fasaanaa hai ye

Bahut daraaz fasaanaa hai ye

बहुत दराज़ फ़साना है ये
इक ज़ख्म बहुत पुराना है ये

कुछ रोग होते हैं लाइलाज़
इक ज़ख्म खा के जाना है ये

गीत विरह का उम्र भर ही
हमको बस अब गाना है ये

कुछ लोग मिलते हैं किस्मतों से
उस से बिछड़ के जाना है ये

है इश्क़ नहीं ये सब के लिए
"राज" हमने अब माना है ये

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 06 मई 2017 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!
    

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  2. बहुत सुंदर !

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