बाज़ीचः-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
इक खेल है औरंगे-ए-सुलेमाँ मेरे नज़दीक
इक बात है एजाज़े मसीहा मेरे आगे
जुज़ नाम, नहीं सूरते आलम मुझे मंजूर
जुज़ वहम नहीं, हस्ति-ए-आशिया मेरे आगे
होता है निहाँ गर्द में सहरा, मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे: दरिया मेरे आगे
मत पूछ के क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख के: क्या रंग ...