Sunday, August 14, 2011

ख़िरद मन्दो से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है Khirad mando se kya poochhoon ki meri ibtida kya hai.

ख़िरद मन्दो  से  क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है कि मैं इस फिक्र में रहता हूँ मेरी इन्तहा क्या है खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रिज़ा क्या है नज़र आई  मुझे तक़दीर की गहराइयाँ इसमें न पूछ ऐ हमनशी मुझसे वो चश्मे-सुर्मा-सा क्या है नवाए-सुबह...