
हुई ताखीर, तो कुछ बाइसे ताखीर भी थाआप आते थे, मगर कोई इनाँगीर भी थातुमसे बेजा है मुझे अपनी तबाही का गिलाउससे कुछ शाइब-ए-खूबी-ए-तकदीर भी थातू मुझे भूल गया हो तो पता बतला दूंकभी फ़ितराक में तेरे कोई नख्चीर भी था ?कैद में है तेरे वहशी की वोही जुल्फ की यादहाँ कुछ इक रंजे गराँ बारि-ए-जंजीर भी थाबिजली...