Sunday, May 22, 2011

हुई ताखीर, तो कुछ बाइसे ताखीर भी था Hui takhir, Toh kuch baaise takhir bhi tha

हुई ताखीर, तो कुछ बाइसे ताखीर भी थाआप आते थे, मगर कोई इनाँगीर भी थातुमसे बेजा है मुझे अपनी तबाही का गिलाउससे कुछ शाइब-ए-खूबी-ए-तकदीर भी थातू मुझे भूल गया हो तो पता बतला दूंकभी फ़ितराक में तेरे कोई नख्चीर भी था ?कैद में है तेरे वहशी की वोही जुल्फ की यादहाँ कुछ इक रंजे गराँ बारि-ए-जंजीर भी थाबिजली...

Monday, May 16, 2011

वो कहती है सुनो जानम मोहब्बत मोम का घर है Wo kahti hai suno janam mohabbat mom ka ghar hai

 वो  कहती  है  सुनो  जानम मोहब्बत  मोम का  घर  है तपिश ये बदगुमानी  की कहीं  पिघला  न  दे  इस को मैं  कहता  हूँ जिस  दिल  मैं  ज़रा  भी   बदगुमानी   हो वहाँ  कुछ  और ...

Saturday, May 14, 2011

ये तो नहीं कि ग़म नहीं ye toh nahin ki gam nahin

 ये तो नहीं कि ग़म नहीं हाँ! मेरी आँख नम नहीं तुम भी तो तुम नहीं हो आज हम भी तो आज हम नहीं अब न खुशी की है खुशी ग़म भी अब तो ग़म नहीं मेरी नशिस्त है ज़मीं खुल्द नहीं इरम नहीं क़ीमत-ए-हुस्न दो जहाँ कोई बड़ी रक़म नहीं लेते हैं मोल दो जहाँ दाम नहीं दिरम नहीं सोम-ओ-सलात से फ़िराक़ मेरे गुनाह कम नहीं मौत अगरचे मौत है मौत से ज़ीस्त कम नहीं              ...

दोस्त अहबाब की नज़रों में (Dost ki ahbaab nazron mein)

दोस्त अहबाब की नज़रों में बुरा हो गया मैंवक़्त की बात है क्या होना था क्या हो गया मैंदिल के दरवाज़े को वा रखने की आदत थी मुझेयाद आता नहीं कब किससे जुदा हो गया मैंकैसे तू सुनता बड़ा शोर था सन्नाटों कादूर से आती हुई ऐसी सदा हो गया मैंक्या सबब इसका था, मैं खुद भी नहीं जानता हूँरात खुश आ गई और दिन से ख़फ़ा हो गया मैंभूले-बिछड़े हुए लोगों में कशिश अब भी हैउनका ज़िक्र आया कि फिर नग़्मासरा हो गया मैं                          ...

Monday, May 9, 2011

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग (Mujhse pehli si mohabbat mere mehboob na maang)

मुझसे  पहली  सी   मोहब्बत  मेरे  महबूब   न  मांगमैंने  समझा  था  के  तू   है  तो  दरख्शां  है  हय्याततेरा  ग़म   है  तो  शाम -ए-दहर  का  झगड़ा क्या  हैतेरी  सूरत  से  है  आलम  में  बहारों  को  सबाततेरी  आँखों  के ...