हम दीवानों की क्या हस्ती
है आज यहाँ , कल वहाँ चले
मस्ती का आलम साथ चला
हम धुल उड़ाते जहाँ चले
आए बनकर उल्लास अभी
आंसू बनकर बह चले अभी
सब कहते ही रह गए , अरे
तुम कैसे आए , कहाँ चले !
किस ओर चले ? यह मत पूछो
चलना है , बस इसलिए चले
जग से उसका कुछ...
Saturday, November 6, 2010
शायद नहीं Shaayad Nahi
तुम्हारे चहरे के उल्लास को
चंचलता को
अतीत से खोज रही मेरी बूढ़ी आँखे
जिसमे भरे थे
गुलमोहर के फूलों के चटक रंग
और तुम्हारे पास होने का अहसास
दबी-दबी सी मधुर आवाज
छुन-छुन करती धीमी सी हंसी
आज भी मेरे ठसा-ठस भरे दिल के
कोने में चिपकी पड़ी है
कच्चे गडारों वाले रास्ते
जो खेतों के बिच गहराते जा रहे हैं
बैलों की घंटियों की रूनझुन आवाज
मेरी जिन्दगी बाजरे के खनखनाते दानो सी
खुशियों से भरी थी
वो सब तुम्हरे...