तुम जानो, तुमको ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो Tum jaano tumko gair se jo rasm-o-raah ho सोमनाथ चतुर्वेदी 9:34 AM Ghalib, Love, poetry 3 comments तुम जानो, तुमको ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह होमझको भी पूछते रहो तो क्या गुनाह होबचते नहीं मुवाखज़:-ए-रोज़े हश्र सेकातिल अगर रक़ीब है तो तुम गवाह होक्या वो: भी बेगुनह: कुश-ओ-हक़ ना शानस है?माना के: तुम बशर ... Share This: Facebook Twitter Google+ Stumble Digg