चाँद तनहा है Chand Tanha Hai सोमनाथ चतुर्वेदी 10:43 AM Judaai, Meena Kumari, poem, separation No comments चाँद तनहा है आसमान तनहा दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा बुझ गयी आस छुप गया तारा थर थराता रहा धुआं तनहाज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तनहा है ... Share This: Facebook Twitter Google+ Stumble Digg