Thursday, October 28, 2010

एहसास Ehsas

तेरे  दुःख  और  दर्द  का  मुझपर   भी  हो  ऐसा  असर
तू  रहे  भूखा  तो , मुझसे  भी  न  खाया  जाए

तेरी   मंजिल  को  अगर  रास्ता  न  मै  दिखला  सकूँ
मुझसे  भी  मेरी  मंजिल , को  न  पाया  जाए

तेरे  तपते  शीश  को  गर ,छाँव  न  दिखला  सकूँ
मेरे  सर  की  छाँव  से ,सूरज  सहा  न  जाए

तेरे  अरमानो  को  गर  मै , पंख  न  लगाव  सकूँ
मेरी  आशाओं  के  पैरों  से  चला  न  जाये

तेरे  अंधियारे  घर  को  रोशन  अगर  न  कर  सकूँ
मेरे  आंगन  के  दिए  से  भी  जला  न  जाये

तेरे  घावों  को  अगर , मरहम  से  न  सहला  सकूँ
मेरे  नन्हे  जख्म  को  बरसों  भरा  न  जाए

आग  बुझती  है  यहाँ ,गंगा  में  भी  झेलम  में  भी
कोई  बतलाये  कहाँ , जाकर  नहाया  जाए

1 comment:

  1. The blog is very good!
    Congratulations!
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